Thursday, 22 October 2009

Some old roads revisited

मिलते हैं साथी तो बिछड़ भी जाते हैं
रिश्तों की डोर छोड़ भी जाते हैं
दिल मॆं बसले हर रिश्ते को , ये मुमकिन तो नहीं
पर कुछ पल हम इस दिल मॆं,छुपा hइ जाते हैं !!!!

आंखों मॆं बसाते हैं दोस्तों को , दिल मॆं बसाते नहीं
जब वक्त आए छोड़ने का, कहीं ये दिल टूट जाए नहीं.....

हर मुस्कराहट हसिनहीं होती ... हर आहट प्यार की नहीं होती...
जो छूट जाते हैं रिश्ते, उन्हें जोड़ सके
ऐसी कोई डोर नहीं होती .......